अमृत विहार न्यूज

औरंगाबाद
जिले के किसानों को तकनीक से जोड़ने और सरकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से पहुँचाने के लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। जिला पदाधिकारी श्रीमती अभिलाषा शर्मा (IAS) के निर्देशानुसार, औरंगाबाद में “फार्मर रजिस्ट्री – किसान की डिजिटल पहचान” अभियान का भव्य आगाज किया गया है।मंगलवार को संयुक्त कृषि भवन परिसर में जिला कृषि पदाधिकारी श्री संदीप राज ने प्रचार रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रथ गांव-गांव जाकर किसानों को डिजिटल पंजीकरण के प्रति जागरूक करेगा।
क्यों जरूरी है फार्मर आईडी?
जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि फार्मर रजिस्ट्री केवल एक पंजीकरण नहीं, बल्कि किसानों का डिजिटल आधार है। इसके बनने से किसानों को निम्नलिखित लाभ मिलेंगे:
1.पीएम-किसान निधि: बिना किसी बाधा के सम्मान निधि की राशि सीधे खाते में आएगी।
2.MSP पर बिक्री: धान, गेहूं एवं अन्य फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेचने में आसानी होगी।
3.सटीक मुआवजा: फसल क्षति होने पर ‘रियल-टाइम’ सत्यापन के आधार पर वास्तविक मुआवजा मिल सकेगा।
4.पारदर्शिता: बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और योजनाओं का लाभ सीधे पात्र किसान तक पहुंचेगा।
किसान क्या करें?
अभियान के दौरान ई-केवाईसी (e-KYC) और भूमि सत्यापन का कार्य प्रमुखता से किया जाएगा। प्रशासन ने अपील की है कि सभी किसान भाई-बहन अपने आधार कार्ड, बैंक पासबुक और भूमि से संबंधित दस्तावेजों के साथ निर्धारित तिथियों पर अपने पंचायत शिविरों में अवश्य उपस्थित हों।
शिविरों का आयोजन: दो चरणों में होगा पंजीकरण
प्रशासन ने किसानों की सुविधा के लिए पंचायत स्तर पर विशेष शिविरों की रूपरेखा तैयार की है। यह अभियान दो मुख्य चरणों में चलाया जाएगा:
प्रथम चरण: 06 जनवरी से 09 जनवरी 2026 तक।
द्वितीय चरण: 18 जनवरी से 21 जनवरी 2026 तक।
“डिजिटल किसान ही सशक्त किसान की पहचान है। हमारा लक्ष्य जिले के हर एक किसान को इस डिजिटल तंत्र से जोड़ना है ताकि उन्हें अपने हक के लिए भटकना न पड़े।”
– श्री संदीप राज, जिला कृषि पदाधिकारी



