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पैरासिटामोल एवं अन्य सामान्य दवाओं पर प्रतिबंध

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने कहा कि केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन को पैरासिटामोल दवा पर प्रतिबंध से संबंधित अफवाहों की कोई जानकारी नहीं है

अमृत विहार न्यूज

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने कहा है कि केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन को पैरासिटामोल दवा पर प्रतिबंध से संबंधित अफवाहों की कोई जानकारी नहीं है। इसने आगे कहा कि देश में पैरासिटामोल दवा पर प्रतिबंध नहीं है लेकिन हाल ही में देश में विभिन्न निश्चित खुराक संयोजनों, जिसमें पैरासिटामोल का अन्य दवाओं के साथ संयोजन भी शामिल हैं, देश में प्रतिबंधित किए गए हैं ।औषधि विभाग के अंतर्गत राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 2013 (डीपीसीओ, 2013) के अंतर्गत ओटीसी दवाओं सहित दवाओं की कीमतें निम्नलिखित तरीके से निर्धारित करता है एवं निगरानी करता है:

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने कहा है कि आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा सरकारी अस्पतालों, ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों सहित सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में आने वाले मरीजों के जेब पर बोझ को कम करने के लिए सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत निःशुल्क दवा सेवा पहल की शुरुआत की है। इसके अंतर्गत राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को उक्त मिशन के लिए उनके समग्र संसाधन के अंतर्गत, उनके कार्यक्रम कार्यान्वयन योजनाओं में उनके द्वारा प्रस्तुत की गई आवश्यकताओं के आधार पर सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में निःशुल्क आवश्यक दवाओं के प्रावधान के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। उक्त पहल के अंतर्गत सहायता औषधियों की खरीद, गुणवत्ता सुनिश्चित करने, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन एवं गोदाम, पर्चे का ऑडिट और शिकायत निवारण की मजबूत प्रणाली को सुदृढ़ करने या स्थापित करने के लिए उपलब्ध है। साथ ही मानक उपचार दिशा-निर्देशों के प्रसार तथा औषधि एवं टीका वितरण प्रबंधन प्रणाली (डीवीडीएमएस) नामक सूचना-प्रौद्योगिकी सक्षम मंच की स्थापना के लिए सहायता उपलब्ध है जिसका उपयोग आवश्यक दवाओं की खरीद एवं उपलब्धता की वास्तविक स्थिति की निगरानी के लिए किया जाता है। राष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन गतिविधि की निगरानी को सुगम बनाने के लिए एक केंद्रीय डैशबोर्ड विकसित किया गया है। कुछ राज्यों ने आवश्यक दवाओं की खरीद एवं उपलब्धता की स्थिति की निगरानी के लिए उप-स्वास्थ्य केंद्रों तक डीवीडीएमएस पोर्टल की शुरुआत भी की है।स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने सिफारिश किया है कि आवश्यक औषधियों की सूची सुविधानुसार सरकारी अस्पतालों, ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों सहित सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में उपलब्ध की जानी चाहिए। उप स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, उप-जिला अस्पतालों एवं जिला अस्पतालों के लिए अनुशंसित आवश्यक दवाओं की सूची में क्रमशः 106, 172, 300, 318 और 381 दवाएं शामिल हैं, जिनमें राज्यों को और दवाएं शामिल करने की छूट प्रदान की गई है।सरकारी अस्पतालों एवं ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं में आवश्यक दवाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए, मेडिकल स्टोर्स संगठन (एमएसओ)/ सरकारी मेडिकल स्टोर डिपो (जीएमएसडी) के पास 697 दवा फार्मूलेशन के लिए सक्रिय दर अनुबंध हैं। एमएसओ के पास पूरे देश में 1,152 पंजीकृत मांगकर्ता हैं, जिनमें सरकारी अस्पताल एवं ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं, जो एक वित्तीय वर्ष में चार बार एमएसओ-डीवीडीएमएस एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के माध्यम से एमएसओ/जीएमएसडी को दवाओं की आपूर्ति की मांग कर सकते हैं।यह जानकारी केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी।

तीन प्रमुख बातें

1. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा जारी आवश्यक औषधियों की राष्ट्रीय सूची में सूचीबद्ध एवं डीपीसीओ, 2013 की प्रथम अनुसूची में शामिल, ओटीसी औषधियों सहित, औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) अधिकतम मूल्य निर्धारित करता है और थोक मूल्य सूचकांक (सभी वस्तुओं) के आधार पर उनमें वार्षिक संशोधन करता है। अनुसूचित औषधियों के सभी निर्माताओं, आयातकों और विक्रेताओं को अपने उत्पाद निर्धारित अधिकतम मूल्य (और लागू स्थानीय करों सहित) के भीतर बेचने की आवश्यकता है।

2. नई दवाओं (अर्थात एनएलईएम में सूचीबद्ध किसी दवा के मौजूदा निर्माताओं द्वारा किसी अन्य दवा के साथ संयोजन करके या ऐसी दवा की क्षमता या खुराक या दोनों में परिवर्तन करके शुरू किए गए फॉर्मूलेशन), जिनमें ओटीसी दवाएं भी शामिल हैं, के लिए एनपीपीए खुदरा मूल्य निर्धारित करता है। यह खुदरा मूल्य आवेदक निर्माता एवं विक्रेता दोनों पर लागू होता है, जिन्हें इन दवाओं को निर्धारित खुदरा मूल्य के भीतर बेचना आवश्यक है।

3. अन्य गैर-अनुसूचित फॉर्मूलेशनों के लिए, जिनमें गैर-अनुसूचित ओटीसी फॉर्मूलेशन भी शामिल हैं, निर्माताओं को पिछले 12 महीनों के दौरान उनके द्वारा शुरू किए गए ऐसे फॉर्मूलेशनों के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में एमआरपी के 10% से ज्यादा वृद्धि नहीं करनी होती है और एनपीपीए इसे सुनिश्चित करने के लिए उनके एमआरपी की निगरानी करता है।

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