अमृत विहार न्यूज

संवाद सहयोगी |गोह
गोह (औरंगाबाद)। बिहार कला संस्कृति एवं युवा विभाग तथा जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राजकीय देवकुंड महोत्सव के दूसरे दिन मंगलवार को मंच पर स्थानीय और क्षेत्रीय कलाकारों का दबदबा रहा। हालांकि, व्यवस्थागत खामियों और प्रचार-प्रसार की कमी के कारण दर्शकों की संख्या उम्मीद से काफी कम रही।महोत्सव के दूसरे दिन स्थानीय प्रतिभाओं ने अपनी गायकी और कला से उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।शारदा पटेल, मंधिर राज, शशि सरगम, कुन्दन भोजपुरिया, रिंकी कुमारी और अमृत अलबेला,गौतम उपाध्याय, प्रिंस बबाली, सोनू साहिल,आकाश तिवारी, रवि कुमार, सूरज कुमार, हिमांशु यादव, शालिनी भारद्वाज, सौरभजीत कुमार और शिक्षक सनोज सागर ने अपनी सुंदर प्रस्तुतियों से श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया

कुर्सियां रहीं खाली, दिखा अव्यवस्था का आलम
एक तरफ जहाँ मंच पर कलाकारों का उत्साह चरम पर था, वहीं दूसरी ओर दर्शक दीर्घा में सन्नाटा पसरा रहा। महोत्सव के दूसरे दिन अधिकांश कुर्सियां खाली नजर आईं।स्थानीय लोगों का मानना है कि जिला प्रशासन द्वारा महोत्सव का व्यापक प्रचार-प्रसार नहीं किया गया, जिसके कारण आम जनता को इसकी सही जानकारी नहीं मिल सकी। प्रचार के अभाव में दर्शकों का जुड़ाव महोत्सव से नहीं हो पाया,जो चर्चा का विषय बना रहा।मुख्य रूप से कार्यक्रम में स्कूली बच्चों की उपस्थिति दिखीं।बताते चलें कि देवकुंड महोत्सव का यह तीसरा वर्ष है लेकिन महोत्सव की भव्यता कटघरे में खड़ा है।

देवकुंड के स्थानीय निवासी सह वरिष्ठ पत्रकार डॉ आशुतोष मिश्रा ने देवकुंड महोत्सव पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महोत्सव में उपस्थित गोह व हसपुरा प्रखंड के पत्रकारों के साथ दर्जनों जनप्रतिनिधियों को महोत्सव में बुलाकर सम्मान नहीं दिया गया। सिर्फ चार पत्रकारों को बुके देकर सम्मानित किया गया यह भी अपमानजनक बात है। बुके की जगह देवकुंड का प्रतीक चिन्ह भेंट करना चाहिए था। जिला प्रशासन का इस प्रकार का व्यवहार उचित नहीं है। उन्होंने इसे “सम्मान का सवाल” बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। वहीं स्थानीय लोगों में यह भी चर्चा है कि सरकार अनावश्यक तरीके से लाखों रुपए खर्च कर देवकुंड महोत्सव के नाम पर सिर्फ कोरम पूरा करती है।




