अमृत विहार न्यूज

गौतम उपाध्याय
औरंगाबाद (बिहार):
बिहार के प्रवासी मजदूरों की नियति शायद यही है—अपनों की खुशियों के लिए अपनों से दूर रहना और अंत में अपनों की ही गोद में कफ़न में लिपटकर वापस आना। ताज़ा मामला औरंगाबाद जिले के रफीगंज थाना क्षेत्र के सिहुली (चंदौली)गांव का है, महेंद्र यादव के पुत्र ( 29 वर्षीय) मुन्ना कुमार की ग्रेटर नोएडा में सड़क दुर्घटना में दर्दनाक मौत हो गई।
क्या है पूरी घटना?
मुन्ना कुमार ग्रेटर नोएडा की ‘मोमेज’ नामक कंपनी में सैमसंग मोबाइल के पार्ट्स जोड़ने का काम करते थे। बीते मंगलवार की शाम, जब वे दिनभर की थकान मिटाने के लिए ड्यूटी के बाद अपने किराए के कमरे पर लौट रहे थे, तभी सड़क पार करते समय एक अनियंत्रित बस ने उन्हें कुचल दिया। हादसा इतना भीषण था कि मुन्ना की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक मुन्ना अपने परिवार के बड़े बेटे थे और पूरे घर की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी। बिहार में रोजगार के अभाव ने उन्हें सात समंदर पार तो नहीं, लेकिन अपनों से सैकड़ों मील दूर नोएडा की गलियों में भटकने को मजबूर कर दिया था।
पीछे छूट गया परिवार: मुन्ना अपने पीछे पत्नी किरण देवी, बेटी प्रियंका, पुत्र प्रतीक और छोटे भाई मुनचुन को छोड़ गए हैं।
आंसुओं का सैलाब: घर में जैसे ही मौत की खबर पहुँची, माँ सरस्वती देवी और पत्नी किरण देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है, क्योंकि हर कोई जानता है कि एक मजदूर के जाने का मतलब केवल एक जान जाना नहीं, बल्कि पूरे परिवार की जीविका का उजड़ जाना होता है।

प्रशासन की सुस्ती और परिजनों का दर्द
हैरानी और दुख की बात यह है कि घटना के करीब 15 घंटे बाद स्थानीय प्रशासन ने परिजनों को इसकी सूचना दी। फिलहाल, पोस्टमार्टम के बाद नोएडा पुलिस ने शव को परिजनों को सौंप दिया है। मुन्ना का पार्थिव शरीर एम्बुलेंस के माध्यम से उनके पैतृक गांव लाया जा रहा है।
” बिहार के न जाने कितने ‘मुन्ना’ हर रोज रोटी की तलाश में दूसरे राज्यों की भेंट चढ़ जाते हैं। यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि उस विवशता की कहानी है जो एक युवा को घर से दूर मौत के आगोश में धकेल देती है। “



