अमृत विहार न्यूज

रामनिवास पाण्डेय
रोहतास (बिहार): बिहार के ऐतिहासिक और सामरिक महत्व वाले रोहतासगढ़ किले तक पहुँचने का सपना एक बार फिर चकनाचूर हो गया है। लगभग 13.65 करोड़ रुपये की लागत से बनकर तैयार हुआ बहुप्रतीक्षित रोपवे अपने अंतिम ट्रायल (Testing) के दौरान ही ताश के पत्तों की तरह ढह गया। गनीमत यह रही कि यह हादसा ट्रायल के दौरान हुआ और केबिन में कोई पर्यटक सवार नहीं था, अन्यथा एक बड़ी जनहानि हो सकती थी।
कैसे हुआ हादसा?
घटना शुक्रवार (26 दिसंबर 2025) की है, जब अकबरपुर स्थित बेस कैंप से तकनीकी विशेषज्ञों की देखरेख में केबिनों को किले की ओर भेजकर लोड टेस्टिंग की जा रही थी। जैसे ही ट्रॉलियां पहाड़ी के मध्य तक पहुँचीं, अचानक मुख्य तार (Wire) में तकनीकी खराबी आई और पूरा सिस्टम लोड नहीं सह पाया। देखते ही देखते रोपवे का मुख्य पिलर उखड़कर नीचे गिर गया, जिससे भारी तबाही हुई। वहां मौजूद मजदूरों और कर्मियों ने भागकर अपनी जान बचाई।
निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा 2019 में शिलान्यास किए गए इस प्रोजेक्ट का इंतजार पर्यटक पिछले 6 सालों से कर रहे थे। नए साल पर इसे आम जनता के लिए खोला जाना था, लेकिन इस हादसे ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और इंजीनियरिंग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिलर के निर्माण में भारी लापरवाही और घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया है।
इस घटना के बाद पर्यटन विभाग में हड़कंप मच गया है और प्रशासन ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। अब इस रोपवे के दोबारा शुरू होने में लंबा वक्त लग सकता है, जिससे स्थानीय पर्यटन को भी गहरा झटका लगा है।



